छत्तीसगढ़

जिले में सुपोषण अभियान से कुपोषण की दर आधा रह गया

Shantanu Roy
28 Sept 2026 8:47 PM IST
जिले में सुपोषण अभियान से कुपोषण की दर आधा रह गया
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Mahasamund. महासमुंद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा यात्रा सेवा, सुशासन और जनकल्याण के संकल्प से जुड़ी रही है। विशेष रूप से बच्चों और महिलाओं के पोषण, स्वास्थ्य एवं कल्याण को प्राथमिकता देते हुए केंद्र सरकार द्वारा संचालित पोषण संबंधी योजनाओं का उद्देश्य देश की भावी पीढ़ी को स्वस्थ और सशक्त बनाना है। इन्हीं प्रयासो से महासमुंद जिले में 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों का वर्तमान में कुपोषण दर 33 प्रतिशत से घटकर 16.32 प्रतिशत रह गई है। वर्ष 2014-15 में जहां कुपोषण की दर 33.2 प्रतिशत थी, वहीं वर्तमान में घटकर अधी रह गई है। जिसका सकारात्मक प्रभाव महासमुंद जिले के हजारों बच्चों में देखने मिल रहा है। बागबाहरा विकासखंड की आरती, नयापारा खुर्द के पुलकित रात्रे के जीवन में देखने को मिला, जिसकी योजनाबद्ध पोषण देखभाल और सतत निगरानी से कुपोषण को मात देकर सुपोषण की राह पकड़ी।

जब 3 वर्ष की आरती पहली बार आंगनबाड़ी केंद्र पहुंची, तब उसका वजन उसकी उम्र के अनुरूप काफी कम था। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा नियमित नाप-जोख और पोषण स्तर की जांच के दौरान आरती को गंभीर कुपोषित श्रेणी में चिन्हित किया गया। वह बार-बार बीमार पड़ती थी, सुस्त रहती थी और उसकी पोषण स्थिति चिंताजनक थी। आरती की गंभीर पोषण स्थिति की पहचान होने के बाद उसे तत्काल पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया गया। वहां 14 दिनों तक चिकित्सकों एवं विशेषज्ञों की निगरानी में उसका उपचार किया गया। उसे आवश्यक दवाइयां, संतुलित एवं पोषक आहार तथा चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध कराई गई। नियमित निगरानी से आरती की स्वास्थ्य एवं पोषण स्थिति में सुधार की शुरुआत हुई। पोषण पुनर्वास केंद्र से डिस्चार्ज होने के बाद भी आरती की देखभाल लगातार जारी रखी गई। सुपोषण अभियान एवं पोषण आहार योजना से जुड़े प्रावधानों के तहत उसे आंगनबाड़ी केंद्र में नियमित रूप से गरम भोजन के साथ अतिरिक्त पोषण आहार उपलब्ध कराया गया। उसके आहार में अंडा, मूंगफली-गुड़ की चिक्की तथा रेडी-टू-ईट जैसे पोषक खाद्य पदार्थ शामिल किए गए। इससे आरती को उसकी आवश्यकता के अनुरूप अतिरिक्त ऊर्जा एवं पोषक तत्व मिलते रहे। आरती के बेहतर स्वास्थ्य के लिए केवल आंगनबाड़ी केंद्र तक सीमित प्रयास नहीं किए गए।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और मितानिन नियमित रूप से उसके घर पहुंचीं। उन्होंने आरती की मां को स्वच्छता, बच्चों की उचित देखभाल और संतुलित आहार के महत्व की जानकारी दी। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हरी सब्जियों, दालों एवं अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों से घर पर पोषक भोजन तैयार करने की विधि भी समझाई गई। इस सतत परामर्श और गृह भ्रमण से परिवार को भी आरती की पोषण आवश्यकताओं के प्रति जागरूकता मिली। लगातार छह महीनों तक उपचार, अतिरिक्त पोषण आहार, नियमित निगरानी और परिवार की सहभागिता से आरती के स्वास्थ्य में सुधार आया। उसका वजन धीरे-धीरे बढ़ा और वह गंभीर कुपोषित श्रेणी से बाहर निकलकर सामान्य
पोषण श्रेणी
में पहुंच गई। आज आरती एक स्वस्थ, सक्रिय और हंसमुख बच्ची है। इसी तरह पुलकित रात्रे की मां भारती रात्रे बताती है कि जन्म से ही उनका पुत्र गंभीर कुपोषित श्रेणी में था। उन्हें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा गृह भेंट के माध्यम से स्तनपान के तरीके और महत्व समझाया गया तथा पुलकित को छः माह पूर्ण होने पर स्तनपान के साथ-साथ उपरी आहार एवं आगनबाड़ी केन्द्र से प्राप्त रेडी टू ईट और पौष्टिक दलिया भी खिलाया गया। मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना अंतर्गत पुलकित का स्वास्थ्य जांच कर दवाई दिया गया, जिससे उसके वजन में बढ़ोत्तरी हुई। अब पुलकित कुपोषण से मुक्त होकर सामान्य श्रेणी में आ गया है।
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